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था बहुत कहने को लेकिन अब तो चुप बेहतर है।

बह्र- 2122-2122-2122-22 है बहुत कहने को लेकिन अब तो चुप बहतर है।। जो समझ पाए न तुम क्या फायदा कहकर है।। शोर कितना ही मचाये, या करे अब बकझक। मैं समझ लेता हूँ मेरा दिल भी इक दफ्तर है।। खुश नशीबी ...

काफी के दो कफ

होटल की टेबल में दो काफी कफ के जैसे हैं जो अपने में तपते हैं । हवाओं की छुअन छूती है दोनों ज़िस्म को लेकिन वो अपनी जगह पर हैं मैं अपनी जगह पर हूँ। हम दुनियां की समझ में दो ... कफ बस ए...