काफी के दो कफ

होटल की टेबल में
दो काफी कफ के जैसे हैं
जो अपने में तपते हैं ।
हवाओं की छुअन
छूती है दोनों ज़िस्म को लेकिन
वो अपनी जगह पर हैं
मैं अपनी जगह पर हूँ।

हम दुनियां की समझ में
दो ...
कफ बस एक जैसे हैं
गर्म काफी से तपती देह लेकर
बस रखे से हैं ।

मगर उंगली की पकड़
अधरों का वो स्पर्श
बस हमको ही मालूम है
वो अहसास वो छुअन वो तरकीब
नजरिया वो गठन
कहाँ समझेगा कोई ?????

..®©अमोद

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