कमी नही होती.....
प्यार की अब कमी नही होती
लौट जाता बुरा समय है जो
आज कोई कड़ी नहीं होती
जिंदगी की नही रही कीमत
साँस चलती रुकी नही होती
बेंच डाला दरों इमां जो था
घर दिवाले पड़ी नही होती
आँख रोती न हो खुली हो कर
मुस्कराहट कमी नही होती....
दर्द है जिंदगी मुझे कल का
प्यार अब बन दगी नही होती
मह फिला है अंदाज बोलूँ तो
सादगी पर कड़ी नही होती
खूब सूरत है तू कहा की है
शायरी हम नसीं नही होती
बाग़ बीरान है उसी का है
रोष की जिन्दगी नही होती
अब मिलन का रहा जहा प्यासा
प्यास की तय घडी नही होती
आख का हो नही न कोई तो
आँश वरसा झड़ी नही होती
अन कहा ही कहो कोई वादा
रात वैसी बड़ी नही होती
जा कही दफ्न कर है जो वो है
रौशनी कम कभी नही होती
मुकदर का खेला खेला जो है
हार माला चढ़ी नही होती..आमोद बिन्दौरी
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें