उनकी नजरों में सौदा अलग है
बह्र--2122-1221-22
उनकी बातों में चहरा अलग है।।
आज बातों का लहजा अलग है।।
ओर कोई क्या उन्हें मिल गया है।
उनकी नजरों का सौदा अलग है।।
वो मेरे अब नहीं लग रहे हैं।
लब में लहजों के लहजा अलग है।।
तोड़ कर मुस्कुरा वो रहे दिल।
यूँ अदाओं में रुतबा अलग है।।
रंग अब भी है दामन में उनके।
पर वो दामन में हमसा अलग है।।
आमोद बिंदौरी / मौलिक अप्रकाशित
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