बस यू ही

कभी साधक समर्पित थे  कविता की रचना पर।
मगर अब मंच पर ये कविताएं समर्पित है।।

कभी अहसास होती थी ये कविताएं दिलो का अब।
हो जिसकी जो समझ ,समझे वो उतना मूल्य कविता का।

हैं वो अब कवि जो की समझा रहे हर पंक्ति का आसाय।
वो कविरा उद्धव  रसखान तुलसी कोई कवि थोड़े ही थे।।

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