वजूद इश्क में मेरे मेरा ही साया है

बहर 1212/1122/1212/22

उजाला ज्ञान का हमने यही पे पाया है//
हरएक रिन्द के चेहरे पे नूर आया है//

पढ़ा लिखा भी गवांरों में गिना जाता है/
किताब ज्ञान ने मुझको यही सिखाया है//1//

रकीब आज मुहब्बत ही काट घरे में है/
खुदा या प्यार को किसने नजर लगाया है//2//

रिवाज लेके न बैठो की बज्म तुम से है/
यहाँ है इश्क इबादत जहाँ बिठाया है//3//

सुनोगे गीत मेरे जब भी तुम अकेले में/
लगे हयात का हर लफ्ज गुनगुनाया है//4//

सफ़र नही तो सफ़र का ख्याल की रख लो/
हर एक शख्स मुहब्बत से मुस्कुराया है//5//

न ऐसे सख्त रखो यार ये जुबां अपनी/
मैं जानता हूँ ये अपना नहीं पराया है//6//

सदाकतें तो कभी इंस का नगीना थीं
बस एक  झूठ ने  लोगों का  घर   जलाया है//7//

ये खेल कूद नही है कोई गजल बिद्द्या/
बड़े सलीके से अदबी जहाँ बनाया है//8//

मसीहा बोलें मुहब्बत की है दवा कोई/
ये प्यार रोग है या सिर्फ मोह माया है//9//

जो जी सकूँ तो जिऊं स्नेह का जला दीपक/
वजूद इश्क में मेरे मेरा ही साया है//10//

मौलिक/अप्रकाशित
आमोद बिन्दौरी

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