दर्द खामोशियों
दर्द खामोशियो में
दर्द खामोशियों में लिखूंगा तुम्हे
गर मुनासिब हुआ तो सिउँगा तुम्हे
याद हर एक पन्ना किताबां बना
मैं जिगर में हमेशा रखूँगा तुम्हे
मैंकदों से नहीं है मेरा वास्ता
पर जरूरी हुआ तो पिऊंगा तुम्हे
हौसलों इस कदर टूट बिखरे अगर
तुम ही बोलो तो कैसे जिऊंगा तुम्हे
जिंदगी शक न कर तू मेरे वादे पर
मुस्कुराता हुआ ही मिलूँगा तुम्हे
जो बिन्दौरी समझ दार बनते हो तुम
तो सदा मुस्कुराता रखूँगा तुम्हे....
आमोद बिन्दौरी
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