ला दे.....गजल
बहर :- 122/122/122/122
हमें प्यार पहलू तू फिर से पढ़ा दे
न चुप बैठ ऐसे हदें सब मिटा दे
तकिया नकूशी रिवाजे बुझा के
तू मजहब भुला प्यार दीपक जला दे
मेरे गांव की तंग गलियों में उनसे
मेरा आमना सामना ही करा दे
बनाये मेरे साथ माटी खिलौने
वो बचपन वो घोड़े वो हांथी दिला दे
वो कश्ती वो बादल वो सावन वो झूले
मुझे आज सारे के सारे हि ला दे
समय तोड़ हद और दे फिर जवानी
मुहब्बत अता कर वो मैकश अदा दे
मेरे साथ खींची वो तस्वीर उनकी
बटुये की थैलों में क्रमशः सजा दे
छिपा के रखी प्रेम की पातियां सब
किताबों के पन्नों में नियमतः छिपा दे
मुझे झूमने और गाने भी दे अब
जो दी है मुहब्बत तो साहिल पता दे
मौलिक /अप्रकाशित
आमोद बिन्दौरी
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