माँ की यह देन...

माँ की यह देन कलम मेरी
नित दौड़े माँ के आँगन में...
खनके यह किसी धरोहर सी
बच्चों की तरह मुस्कान भरे
नतमस्तक हो गुरुजन चरणों
ह्रदय में प्रीत का ज्ञान भरे....
सेवक हो लोक धर्म की औ
साहित्य का नित श्रृंगार करे
माँ की यह देन कलम मेरी
नित दौड़े माँ के आँगन में...
आमोद बिन्दौरी

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