तूने आखिर ये खत लिखा कैसे

[3/16, 6:32 PM]
2122-1212-22
जब मुहब्बत नहीं वफ़ा कैसे।।
तूने आखिर ये ख़त लिखा कैसे।।

तूम मुझे भूल भी नहीं पाते।
रोग इतना बड़ा लगा कैसे।।

रात यादों से अब नहीं कटती।
राज इतना बड़ा खुला कैसे।।

रौशनी के लिए जो जलता है।
उस चरागां से घर जला कैसे।।

हमज़बाँ जिंदगी नहीं होता।
साकी इल्जाम ये दिया कैसे।।

घर पुरानी रखी  किताबों से।
ये रूमानी सा ख़त मिला कैसे।।

रौब सबको नहीं दिखातें हैं
मशवरा यार यह दिया कैसे।।

आमोद "बिन्दौरी"
फतेहपुर:

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