अहसास होगा याद अगर करते हैं


2212-22-1122-22

अहसास होगा याद अगर करते हैं।।
आती है क्यूँ चाहत, के क्यूँ घर करते हैं।।

इस आस से की कल कुछ अच्छा होगा।
हम लोग इक दिन और सफर करते हैं।।

मैंने भी अक्सर नाम लिये बिन लिख्खा।
  जज्बात ए दिल बेनाम सफर करते हैं।।

ये आपकी आहट ही कुरेदेगी घर को।
जो छोड़ जाना आप नज़र करतें हैं।।(पेश करना)

ये कह दिया किसने?? की यही सच है इक!
इंसान को भगवान असर करते हैं।

अल्लाह ये भगवान ईशा ड्रामा सब।
इंसानियत आला है अगर करतें हैं।।

मत मान कोई  भी बात मेरी अब सच तू।
है  झूठ, के चाहत कोई ,पर करतें हैं।।

आमोद बिंदौरी / मौलिक अप्रकाशित

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