मैं वक्त कहाँ कब रुकता हूँ


22-22-22-22

मैं कुछ और कहाँ कहता हूँ।।
  गैरों से लिपटा  - अपना हूँ।।

वैमनष्यता न सर उठा पाए।
दुश्मन की तरहा रहता हूँ।।

दरपण भी छू सकता है क्या।
बस ये ऐसे ही -    पूछा हूँ।

कलियाँ खुशबू बिखरायेंगी।
मैं  वक़्त कहाँ कब रुकता हूँ।।

आमोद रखो, बिश्वास रखो।
पग पग जीवन में अच्छा हूँ।।
..अमोद बिंदौरी / मौलिक अप्रकाशित

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