गजल ....चाँद तारों से कभी पूंछा नही
गजल ...चाँद तारो से कभी पूंछा नही
Posted by amod bindourion August 18, 2015 at 11:00pmView Blog
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बहर -2122/2122/2122/212
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आज हम यह सोचते है के बिछड़ कर क्या मिला
हाँ ये सच है जो मिला उसका अलग रस्ता मिला
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सोचता हूँ चाँद तारों से ज़रा मै पूछा लूँ
क्या तुम्हे भी राह में जो भी मिला तन्हा मिला
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आज आँगन में कही तारा नहीं यादों भरा
छिप के कोने में पड़ा घर का हँसी प्याला मिला
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मौसमो की ही तरह है इश्क की आबो हवा
जब चली तो घर मेरा दरका कही टूटा मिला
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देख कर अंजाम अपना मैं बहुत हैरान हूँ
चल पड़ा जिस रास्ते पर वो ग़मों से जा मिला --मौलिक अप्रकाशित
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Tags: गजल
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