एक दिल्ली बिल्ली
लिखा दिल्ली पे करता है
पहुच बिल्ली पर जाता है
सुना करता हु आलोचक से
अक्शर अपने बारे में.........
सोंचता हूँ कभी ऐसा भी
हो जाये मेरे संग
शुरू दिल से करू प्रशंग
पहुच दिल्ली तक जाए जो....
बंद हो सिलसिलाआलोचक का
अक्शर मेरे बारे में........
पूरक है प्रसंसक है कविता का
मगर है तासीर में तल्खी
बदल दूँ जो रुख इसका
ये तीखा होजाये मीठा
अक्शर मेरे बारे में......
आमोद बिन्दौरी...12/08/2015
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें