####उनसे एक मुलाकात....CHAYA CHITRA Srivastava Amod Bindouri

कई वर्षो मे ...आज सुबह उनसे अचानक मुलाकात हो गई....मैँ और वो दोनो नजरें नही मिला पाए... जो उल्झने मेरे पास थी शायद वही उसके पास भी थी ...... मेरी नजरो मे तो थहराव भी था... पर वो वो सभल भी नही पा रहे थे ... एक अजीब सी....कशिश लब भी बड़-बड़ा रहे थे जैसे मुझसे एक शब्द मे बहुत कुछ कहना चाह रहे हों....... पर आँखो की नमी के साथ मेरेओर देख रही थी... 'चेहरे पर तिल मिळाहट से'...."कैसे हो" ठीक:-)... इसके शिवा कोई जवाब ही नही था.... शायद बारिश की वो बूँदे जो हाँथो से फिसल कर जमीँन पर सुख गई थी... उन्हे मैं निँचोड नहीं सकता था... ....मेरे दो बच्चे हैं.! ......._ये दोनो के नाम हैं ! ...कैसे है.?? हाँ. अच्छे है.... .....प्यारे लग रहे हैं .. बिलकुल तुम्हारी तरह :-)... "शायद आज मै उसको भाँप नहींपा रहा था" अच्छा.. तो..अब.. चलती हूँ... हाँ.. बड़ा अजीब लगा ये शब्द... पर सच ये था.. की उसके पास आज मेरे लिए समय नहीं था वो अब दूर जा रही थी.... मेरी ओर अजीब सा देख थी.... उसकी आँखे भीग रही थी..... डुपट्टे से जैसे ....दुश्मनीसी हो गई हो... बार-बार झटक रही थी.... जुल्फेँ.... मुझे देखने से रोक रही हो जैसे..... और मेरी निगाह उस पर थमी थीं.... "कुछ बुड बुडाते हुये कह करचली" मैँ समझ नही पाया था... वो आवाज.. मै देख कर सहम सा रहा था उसके हालात... पर आज उसे मेरी तसल्ली की जरूरत नहीं थी... इतना कम जोर इतना पार्थिव इतना .... कभी नहीं महसूस हुआ था मुझे... जितना आज हो रहा था.... शायद मेरे शरीर से कोई मेरी आत्मा को निकाल ले जा रहा हो.... मेरे चारो तरफ आग सी जल रहीहो..... ओह सिड.... अब वो मुझे दिखनी बंद हो गई.... शायद कल फिर मुलाकात हो... ईसारो मेँ हि साही..कोई बात हो... बस यही सोँच कर मैने भी अपनी निगाहो को तशल्ली दि.. वो एक अजिब सी दर्द की ईबारत लिख ग ई थी..... एक ऐशी ईबारत जिसे मैँ शमझ चुका था... पर यकीन! हाअअअ यकीन नही कर पा रहा था .....आमास के काळे आँधेरे मेँ....वो मुझे साफ सी दिखती है... आज भी. आज भी मैँ उसकी परछाईयोँ को हकीकत समझता हूँ.. पर वो काँच का टुकडा जो कल मेरा आईना था चाहे भी तो अबमेरा आईना नहीँ बन सकता.... बिन्दौरी ये समाज पत्थर मार के तोड देगी..... ;-((अमोद BINDOU ­RI)

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