#######हवायेँ

क्योँ आज वो हवायेँ बिँदौरी मुझसे मेरा हाळ पूँछ बैठी हैँ क्या बदल रहा है वक्त मेरा जो इस तरह से बाँहे डाल बैठी हैँ कल तक नजरो से देख घुमा लेते थे जो आज नजरे लगा के बैठी है जाने क्या 2 कहा था कल जब हमने हाळ पूँछा था आज आमोद मेरे घर मेँ आ के बैठी हैँ शर्म और हया जो बडे दूर की बात थी आज वो आँचळ मे छिपा के बैठीहै मै कुछ बोळू कल के जवाब मे मासूम सी नजरो को आँशुओँ मे डूबा के बैठीँ हैँ शब्दो के संग्रह से ढूँढताहूँ क्या बोळू मैँ आज वो बिन शब्दो के मेरे पास आके बैठीँ हैँ उनकी नजरेँ हर सवाळ का जवाब हैँ मेरे और गर्म शाँसे मेरे दिल के पास जा बैठीँ है क्योँ आज वो हवायेँ बिँदौरी मुझसे मेरा हाळ पूँछ बैठी हैँ क्या बदल रहा है वक्त मेरा जो इस तरह से बाँहे डाल बैठी हैँ

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