बिछौने छीन लेती है

मुझे कागज कलम देकर बिछौने छीन लेती है।
मेरी ये लत सभी मेरे ख़ज़ाने छीन लेती है।

सफ़र राही हुँ मैं तन्हा उसे कैसे बता पाता।
वो पहले ही बची नीदों से सपनें छीन लेती है।।

ये आदत पड़ गयी तब जब मिला मैं राह में तुमसे।
सुना है हुस्न की चाकरी इसारे छीन लेती है।

ये कैसी उम्र होती है जवानी  रुक जरा समझा।
नयी दौलत के आगे क्यों पुराने छीन लेती है।

खुदाया कुछ करिश्मा कर मुझे लौटा दे वो बचपन।
जवानी से  मुझे नफरत खिलौने छीन लेती है।।
आमोद बिंदौरी

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