इक कसक इश्के बीमार
बहर:-2122/1221/1221/12
प्यार का हूँ तलबगार खुदा खैर करे//
हो गया मैं गिरफ्तार खुदा खैर करे//
उनकी बाते नशीली हैं मदिरा की तरह/
बज़्म सारी हुई मैख्वार खुदा खैर करे//
आज आतिश लगे लोगों के बातें लहजे/
लो हुआ मैं गुनहगार खुदा खैर करे//
जाने कैसी सरारत हुई दिल से मेरे/
मन बसी इक है झंकार खुदा खैर करे//
धीरे-धीरे गुजर जाती है आँखों से मेरे/
इक कसक इश्के-बीमार खुदा खैर करे//
आमोद बिन्दौरी
मौलिक /अप्रकाशित
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