प्रश्न चिन्ह??


प्रश्न चिन्ह...???...
अबकी बार भी खेतों के रंग बदले..

हिंदी माह फागुन...
आया...
बसंत गुजरने से
नई कोपल
मुस्कुरा रही हैं...

और
खेत की पगडण्डी में
हरी दुब ...
सुबह मोती जैसी ओस
की बूंदों में सजी है..

अब की बार भी
खेतों ने रंग बदले....
जैसे
हर वर्ष सुनहले हो जाते थे !!!...

वैसे नही.....!!!!!

इस बार ....
रंग कुछ अलग रहा...
अन्न दाता
इस बार भी छट -पटाया
परन्तु
फसल की
कटाई के लिए ....नही...

इस बार प्रकृति ने
ओले बरसाये......
पानी गिराया.....
हाँ....!
इसबार खलिहान
भरेंगें......
पर दानों से नहीं....

रोयेगा.....अन्न दाता
बुंबुआएगा...खलिहान
और
भूखों मारेगें .. जीव!!!!!!!!!!

झींगुर ..जरूर
तिर्र्रर.....त्रीर्र्रर्र
करेगे......

लेकिन
मेहनत के पर्याय!!
चींटियाँ...
कोसों  सफ़र से
खाली लौट आई ....

मधुमखियों के कोषोपर
अब  मधु नही है...

परंतु अब...!!!!

मकड़ियाँ  जाले
तैयार कर रही है.....

राजनीत का वोट
बैंक तैयार है..!!!..

साहूकार ....
भी मुस्कुरा हुआ
बिगुल बजा रहा है..!!!!!

हर बजार
झूठी सांत्वना....
खुले आम माखौल उड़ा...
माहौल में उछाल भर रही हैं...!!!.

यह भी एक रंग है....
जो चिल्ला के कह रहा है...
की समाज बदल रहा है!!!!!!

अबकी बार भी
खेतों ने रंग बदले..!!!
पर कैसे????
यह प्रश्न चिन्ह है.....????

आमोद बिन्दौरी

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