जो दिल से मुहब्बत करूँ

जो दिल से मुहब्बत करूँ तो
बह्र:- 122-122-122-122

मैं दिल से मुहब्बत करूँ तो बुरा क्या??
जो ऐसे इबादत करूँ तो बुरा क्या??

बुरा क्या है जीवन में मुझको बता दो।
जो तुम से ही नफरत करूँ तो बुरा क्या??

ऐ मालिक गरीबी का तिल-तिल युँ मरना।
तुम्ही से शिकायत करूँ तो बुरा क्या??

जहाँ ये मुकद्दर बदले न बदले।
कलम की खुसामत करूँ तो बुरा क्या??

कहर जिंदगी से जो सीखा वो लिक्खा।
मगर अब लियाकत करूँ तो बुरा क्या??

ओ बिन्दौरी अपनी मुहब्बत जुड़ा है।
अभी भी जो हसरत करूँ तो बुरा क्या??
मौलिक/अप्रकाशित
आमोद बिन्दौरी

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