दर एक से पर्दा
बहर :-122-22-122-22
छुपा के नज़रें मिलाना होगा।।
दर एक से पर्दा उठाना होगा।।
न आयेगें जो बुलाना होगा।।
वो मेरा दिल हैं मनाना होगा।।
जो दिल ने उनकी सुनी जो आहट।
तो बहते आंसू छिपाना होगा।।
फकीरी अपनी मुकद्दर अपना।
रिझा खुदा को बनाना होगा।।
फलक के सारे सितारे जैसे।
हयाते सरगम सजाना होगा।।
आमोद बिन्दौरी
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