दौरे हाजिर में हम भी हिले
दौरे हाजिर में हमभी हिले
बह्र:-212-212-212-212
दौरे हाजिर में हम भी हिले कम से कम।।
अब मिटे इश्क के फासले कम से कम ।।
वो न आये न आने का वादा किये।
हाँथ ख़त आएं उनके लिखे कम से कम।।
शहर ईमारतें जब ढही हुस्न की।
रुख नकाबां हटा वी मिले कम से कम।।
बात सीने के अंदर दबी जो रही।
खुल के आने लगी बज्म में कम से कम।।
दर्द चादर उढ़ाने चला था हमें।
चाँद आने लगा आँगने कम से कम।।
आमोद बिन्दौरी
मौलिक/अप्रकाशित
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