दिए तो रौशनी के लिए होते हैं

[3/16, 6:32 PM] आमोद "बिन्दौरी" फतेहपुर: 2122-1212-22
जब मुहब्बत नही वफ़ा कैसे।।
तूने आखिर ये ख़त लिखा कैसे।।

रात यादों में अब नहीं कटती।
राज इतना बड़ा खुला कैसे।।

रौशनी के लिए जो जलता है।
उन चिरागों से घर जला कैसे।।

हमज़बाँ जिंदगी नहीं होता।
साकी इल्जाम ये लगा कैसे।।

घर पुरानी रखी  किताबों में।
ये गुलाबी सा ख़त छिपा कैसे।।
आमोद बिन्दौरी

[3/16, 6:36 PM] आमोद "बिन्दौरी" फतेहपुर: हमज़बाँ हमसफ़र नहीं होता।
साकी इल्जाम ये लगा कैसे।

[3/16, 6:40 PM] आमोद "बिन्दौरी" फतेहपुर: दिए तो रौशनी के लिए होते हैं।
उन चिरागों से घर जला कैसे।

[3/16, 6:40 PM] आमोद "बिन्दौरी" फतेहपुर: इन दरख्ती  रखी किताबों में।
ये गुलाबी सा ख़त मिला कैसे

[3/16, 6:40 PM] आमोद "बिन्दौरी" फतेहपुर: रात यादों में अब नही कटती/
रोग इतना बड़ा लगा कैसे

[3/16, 6:41 PM] आमोद "बिन्दौरी" फतेहपुर: जब मुहब्बत नहीं लगा कैसे।
दर्द मुझको है दिल जला कैसे

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