जीवन हया क खेल है

जीवन हया का खेल है
या यूँही कुछ लगा
कैसे कहुँ की क्या कहाँ
मेर दिल को क्या हुआ

मसरूफियत में नैन है
आदत है इश्क की
दिल में कसक की आग है
मिन्नत है इश्क की
ज़ख्मो का सुरखरू हुआ
कुछ सिलसिला लगा........

जीवन........

कुछ रंग इस हंथेली को
रंगीन कर गए
कुछ रंग जीवनी मेरी
बेरंग कर गए
रंगों का अजब खेल था
जो दिल से जा लगा.....

जीवन.......

बातोंही बातों में
अपनी बता गए
कुछ लोग भाव के
बादल हिला गए
तन्हा सफर में था
मगर परछाईं सा लगा

जीवन......आमोद बिंदौरी

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