तन हारे मन हारे
जब भी तुझे देखा
ह्रदय तार झनके
प्यार के शहर
गीत श्रंगार पनपे
कुछ इस अदा से
निखरा है जीवन मेरा
अधरों से लिपट
मेरी बंशुरी बनके ....
फिजा में फैली महक तेरी
तन में भरी है दहक तेरी
अब हो जीवन में तुम
रंगों से एक रंग रंगके....
करतल करते मै के प्याले
होठों से लिपटे हैं श्वेत काले
मदहोश महक आगाज लिए
रग राग आज बनके...
थर्राते थिठुराते स्याह अधर
छिटकी केश घटा बिखारे
तन हारे ..मन वारे...करतब न्यारे
लिए आँखों में प्यास निहारे.....
आमोद बिन्दौरी
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