खयालो का क्या???
ख्यालों का क्या ,ये तो नित नई खिचड़ी पकाते हैं।
कोई कतरा भी गिरता है, तो उस पर मुस्कुराते हैं ।।
हूँ जिन्दा बंद कमरों सा, बड़ा बेजान सा हूँ मैं।
खिड़कियाँ खड़कती हैं तो दरवाजे गीत गाते हैं।।
आमोद बिंदौरी
ख्यालों का क्या ,ये तो नित नई खिचड़ी पकाते हैं।
कोई कतरा भी गिरता है, तो उस पर मुस्कुराते हैं ।।
हूँ जिन्दा बंद कमरों सा, बड़ा बेजान सा हूँ मैं।
खिड़कियाँ खड़कती हैं तो दरवाजे गीत गाते हैं।।
आमोद बिंदौरी
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