हमनशीं साथ बैठो करें गुफ़्तगू
बहर 212/212/212/212
हमनशीं साथ बैठो करें गुफ़्तगू/
जिंदगी से भी होते रहें रु-ब-रु//
आइना है तू मेरा बता हाले दिल/
खुल के कह दो छिपाते नहीं आरजू//
चाँद अपनी सुनाओ सुनो कुछ मेरी/
सबसे प्यारा खिलौना है बचपन का तू//
देख आमास आँगन भी पूछे मुझे/
प्यार हक़ में नहीं या नहीं जुस्तजू//
आख़री साँस तक मैं करूँ राष्ट्र हित/
गर्व से ही मिटे देश का ये लहू//
इश्के महफ़िल सजाऊँ सदा खुश रहूँ/
एक पल भी मेरा हो नही फालतू//
मौलिक /अप्रकाशित
आमोद बिन्दौरी
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