मुक्तक

हर बात हर सख़्श समझता तो बात और थी ।
जख्मों के तू अश्क समझता तो बात और थी ।

तेरे लिए तो महज इक दिखावा है ये सब।
तू चाँद सा रश्क समझता तो बात और थी।।...@mod

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