जीवन के उतार चढ़ाव भरे सफर में अलग अलग अनुभव प्राप्त हुए। ध्यान से देखने की कोशिस की तो सब कुछ एक लयबद्य लगा। संजोया तो कविता , गजल बनकर कागज़ पर उभर आया। .जीवन का सफर है चलता रहेगा . कोई खोज सायद अधूरी है
मुक्तक
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हर बात हर सख़्श समझता तो बात और थी ।
जख्मों के तू अश्क समझता तो बात और थी ।
तेरे लिए तो महज इक दिखावा है ये सब।
तू चाँद सा रश्क समझता तो बात और थी।।...@mod
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