छलावा...

पुष्पों में सुबह  छहारी ओश..
योवन से  भरी ....
भीनी महक....
दिन की बागडोर  लिए....
रवि की किरणों के इंतजार में...
प्यार में....
विस्वास में...
स्नेह लिए..
दूर दूर तक
वजूद जोए...
प्राकृतिक  छटा का
अस्तित्व पिरोये...

प्यार का दिखावा  लिए रवि...
छलता है...
योवन...
सुन्दरता...
महेक...
गोधुली पर...
वही पुष्प
अपना छला सा ...
वजूद लिए...
कोषता है...
अपने प्यार को...
विस्वाश को...
....आमोद बिन्दौरी

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