बुढ़ापा बचपन ही तो है...
अब तू बच्ची हो
जो कहु वही सुना कर
बच्चों की तरह
जहाँ बैठाऊ
वही बैठा कर
जहाँ लेताऊ
वहीँ लेता कर
सा समय खाना खाया कर
सा समय सोया कर
जादा मेहनत न करा कर
अब मै तुमसे सयाना हु कर लूँगा
अभी तुझे पराये घर जाना है
इस घर के बच्चों और जवान को छोड़...
बेटी ,बहु,माँ.,के रिश्ता बुनना है फिर
तू समझ माँ........
अब तू बच्ची है
भाई बिन्दौरी
बुढ़ापा
बचपन ही तो है ....
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