@कुत्ते की दुम
@कुत्ते की दुम..
आज के समय में कुछ मित्र अपने आप को खुदा मान रहे थे । अभी हाल ही के दिनों की बात थी । कुछ आलोचक मुह उठाये सुधार आन्दोलन छेड़ रहे थे। कभी खुद करता बन जाते है । कभी साथियों को खुननश चढा देते है ।पर खुद ...
गीदड़ो की तरह माँद में सायन करते है।
अपने से नीच दिखाना कोई इनसे सीखे ..समाज के सक्षम लोगो के तलुए चाट .....बहार हुआ हुआ चिल्ला लेते है।
हा कुछ जाहिल से खुद को नेता न कहने वाले मगर नेता मानने वाले lancher बुरा मान जायेगे...
मानने दो... वो तों स्वतंत्र है । किसी की मेहनत जाया नही जनि चाहिए ।
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बात दिल्ली मुंबई आगरे की नही है । न कोई पतुरिया नाच की हो रही है । आओ पूरी रात मजा करो और लोट जाओ....
सायद आसान है। लैप की टक टक की को सुन
घोडा की टापू समझाना
शारीरिक मेहनत किये बगैर बिना धूसर माथ पोंछे...
पैरों पर अर्थो स्पेशलिस्ट स्लीपर
अरहर के खेतों में बड़ा हौसला देता है
नेता जी आये ...2222
स्वर .......अहा
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आमोद बिन्दौरी
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