वो बात नहीं....

वो बात नहीं अब, बात  बताने में....
अपनी पह्चान नहीं,उनके घर  जाने में...

हकीमों की दवा ही, जहर हो जब
मतलब क्या है ,औषधि खाने में...

अब सपने रहने दे ,कपाट ढका
मन लगा  है तू ,हर्फ़ हर्फ़ उड़ाने में...

लौट के नहीं है, आने वाला कोई
क्यों तुला है स्वागत कक्ष सजाने में...

अब लिबास, फटे-पुराने दिखते है
पैबंद कई हैं दिल के तहखाने में...

बातों के बतंगड, कुछ भी कहे.
वो बात नहीं ,टूटे  साज बजाने मे...

बिन्दौरी उसे अब, भूल तू जा
वो  आयेगे नहीं , तुझे दफनाने में....

18/05/15---आमोद बिन्दौरी

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