मयन्कात्मक......
मयंका शीतल ....
मयंकात्मक शीतल है
अवशेषी कण...
अनापेक्षित छोटे...
समीर के झोंकों में
मिश्रित ...
विलेय मान ...
थोड़ा नीचे....
थोडा ऊपर ....
सर्पाकार....
गोलाकार....
स्वतंत्र...वेग
लेकिन अस्वतंत्र....
बे-वजूदी वजूद....
कौन गौर करता है????....
किस पनचत्व का हिस्सा है???
किस बिडम्बना.....
किस समाज.....
किस सामंत का.....
सताया अवसेश है!!
किस छल का
विभाजित....
काटा गया...
किस तरह....
कौन पूछता है???....
हाँ ....
कह देते है. बिन्दौरी..."!!!
मयांकात्मक शीतल है....
अवशेषी कण...!!!!
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