तू वहम न कर....
चढ़ गया है रंग तुझ पर भी, तू वहम न कर...
जंगे मैदान है जा लड़, तू रहम न कर...
गिर गया है उठ जा,थाम शमसीर हांथो में
जख्मों को न देख तू मरहम न कर....
इन्सानों का मुहाफिज है ,देख आँखों में सब के
सब की दुआ है संग ,तू वहम न कर....
जो तेज धार समय है,इनको मन मुआफिक कर
है तुझमे ये कुर्बत ,तू सहन न कर....
बिन्दौरी बन जा मुहाफिज ,खुदा का नाम है दूजा
चादर में रहना सीख, तू अहम न कर....
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