गजल …

रंग चढ़ जाएगा मुझ पर भी ,तू अहम न कर
ऐ जिन्दगी मैने गिर के उठना सीख लिया है

मंज़िल का रहनुमा बन जा ऐ दर्द तू मेरे
गिर गिर के सभँलना ,जो मैने सीख लिया है

थम जाओ चस्मे कतरों ,के वो आ रहे हैं
उनकी अदाओं को समझना, मैने सिख लिया है

इन हवाओ से कह दो, अब आया न करे ये
पैबंद दरख्तों में रहना ,मैंने सीख लिया है

सुनसान जो हैं आज ,यूँ जो चौखटे तेरी
चुप चाप रह के गुजरना, मैने सीख लिया है

एहसास दफ्न कर के ,सँवरना फितूर है
मौका परस्त बनना ,मैने सीख लिया है

उल्झन तू हँसती रह,तूफाने सफ़र में
कस्तियाँ छोड के तैरना, मैने सीख लिया है

इन काँच के टुकड़ों की, अहमियत तो तू समझ
इन्हे सामने रख के,समझना मैने सीख लिया है

यूँ ही नहीँ छोड़ी है,जिल्लते जिन्दगी मुझे
इन काँच के टुकड़ों में,उतरना मैने सीख लिया है
आमोद बिंदौरी

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