समय.....

समय...

अरे रुक जा !
कुछ पल ...ठ हर..

स्पर्श तो होने दे...

खुशियाँ...
ख्वाब...
रिश्ते..

रिस्वत ले...ले....ठहर..

एक ,दो,तीन....पाँच..
ले रख ले...

गुल्लक....ठहर

नाराज न हो

मै दादी के पास था
कहानिया ....
चुटकुले...
सपने ...
बटोर रहा था...

ले यार पकड़.... ठहर

ले खा ले
दादी के
पिंडा के लडडू...ठहर

कुछ नही ..
आम की चोप है
वहां गदरी अमियाँ तो होगी

ले रख झोली में... ठहर


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

जीवन पथ पर संशय गढ़कर ,स्वीकार नहीं तुम मुझको प्रिए

अपने दुख को स्वयं निमंत्रण देता हूं

तब मानूंगा ....प्रेम है तुमसे