वक्त ज्याया न कर...
सफ़र में आ भी जा, वक्त जाया न कर
मै हूँ साथी तेरा ,मोहब्बत बताया न कर...
आँखों में देख के,झांक ले तू ह्रदय
खार बह जाने दे,इन्हे सुखाया न कर
थाम हथेली मेरी ,आ करीब हम -सफ़र
पास रह के मेरे ,दूरियां बनाया न कर
काक की तरह करने दे ,कांव कांव अब इन्हे
घर का दिया है तू मेरे ,घर जलाया न कर
क़त्ल करना है तो आ, क़त्ल कर दे मुझे
धार खंजर दिखा ,अब डराया न कर
मुझे मालूम पिता तेरा बैद्य है मगर
जिस्म के कपडे उतार,जख्म खाया न कर
प्यार बिन्दौरी ,मंदिर मस्जिद नहीं देखता
हवा सा बहने दे अब ,किवाड़ लगाया न कर...
टिप्पणियाँ
एक टिप्पणी भेजें