हमारे विकास में सहायक…फैशन और फिल्म उद्योग

सन 2015 हम विकास शील देशो की सारणी में सबसे ऊपर हैं।आज हमारे समाज में हिन्दी फिल्मों का बढ़िया प्रभाव है।
सबसे ज्यादा कारगर सनी लियोन जी हैं । ये कम कपड़ों मे जीवन यापन का संदेश और मर्दों की कमज़ोरी के बढ़िया शैक्छिक फिल्मी मदर्सों मे सुन्दर अभिनय करती  हैं।
ये फिल्म उद्योग हमारे देश के वणिज्य को अब्र (बादल,आकाश,ऊचाई) तक ले जाता है।और सम्पूर्ण बिश्व में संस्कृतियों को बराबर मात्रा  वितरण करता है।

इनका जायका इतना स्वादिस्ट है कि  हमारे देश के बिन दाँतो वाले पौढ दादा जी …दादी जी को बगल में बैठा कर  अपने एन्ड्रोइड फ़ोन पर चटकारे लेते हैं।
ये फिल्में हमारी संस्कृति पर चार चाँद लगाती है और भारत के हिमालय जैसे सिर पर हीरों का ताज पहनातीं हैं। 
अरे! इनके  डायरेक्ट जुगाड (D.j.)गाने बाप रे बाप…
जो खड़े नहीँ हो पाते और जो डन्डे का सहारा ले खड़े हो जाते हैं सभी को थिरकने पर मजबूर कर देते हैं।
इसका सुरीला धक -धक  कुछ हृदयों को गतिशील कर जाता है
डन्डे के सहारे से खड़े दादा जी अपनी सुन्दर सी ,नई कोपल कामायनी नातिन को थिरकते देख वाह ! वाह करते नहीँ  रूकते…
सबसे बड़ी बात हमारी फिल्मो मे पहने जाने वाले होजरी कपड़े सारे समाज मे एक अलग छाप छोड़ते हैं।आज घर की सुन्दर सी बालाए होजरी कपडो को जब धारण करती हैं।तो उनके शरीर के सारे मापदंड पूर्ण रूप से समाज के नव युवको की आँखों को शीतलता प्रदान करते है।
इन कपड़ों में एक कुदरुप छत्तीसी औरत भी 16साल की सुडौल वक्छ स्थली लिए …काम-मई  …कामायनी आतुर प्रतीत होती है।
और अहंकारी +संस्कारी लड़कियाँ औकात मे रहती है।
अब बिंदौरी हमारे देश में कोई समस्या नहीं है।यहाँ का हर माँ बाप निश्चिंत होकर चौडी खाट  पर पैर फैला पूरी रात खरर्राटे लेता है।और पड़ोसी की आँखें जलन से फूटी जा रही होतीं हैं ।
आज घर की सुन्दर बालाएँ रात को अपने प्रेमी के संग अरहर के,गन्ने के उपवन पर आलिंगन से आनंदित हो रहे होते हैं।
आदि काल के बाद यह सुन्दर समय अब आया है। आज स्थितियाँ इतनी लाभ प्रद हैं कि कोई उँगली नहीँ  उठा सकता है। आज किशोर नुक्कड चौराहों में खुले आकाश के नीचे माशुका  के हाथ थाम रसीले अंगूर जैसे गुलाबी होठों काआनंद ले सकते हैं।

आज हमारा समाज इस मलय का आदी हो गया है।कुछ मुझ जैसे बृक्छ हैं जो कभी कभी अपना नुकीली कलम से प्रदूशण उत्सर्जन कर देते हैं।पर इससे इस उपवन को कोई फर्क नहीँ पड़ता…
ये मलय फिल्मो और दोस्तों के माध्यम से मुफ्त में मिल जाती है
कुछ बेवक़ूफ़ इसकी जानकारी की शिक्छा को लागू करना चाहते है  ।पर हमारा देश ग़ुलामी सह के होशियार हो गया है।
हमारे देश के कर्णधार जो 13-17 के मध्य के हैं। इस ग्यान के प्रकान्ड पंडित है।ये तो महत्मा नारद को भी ढेरों एंगल तरीक़े ईजात  करा  दें। काम देव तो शर्मा के चले जाएँगे…
यहाँ का वातावरण अब स्वतंत्रता की गति से विकास की ओर अग्रसर है।

अब हमारे पौढ समाज की आँखे किरकिराती नहीँ  और बिना चश्मे के दिव्य लोक के नित दर्शन करती है।
अब ब्लागों में भी सुन्दर हृदय श्पर्सी  लेख भाभी से मुलाकात, भाभी की सालियाँ ,चाची हँसमुख… बड़े कारगर कहानियों कि साँस्कृतिक किताबें हैं। जो घर पर बैठे बैठे जन्नत की शेर करा लाती हैं।

हमारा देश आज प्रकाश की ओर अग्रसर है। अब श्री हरि और नारद संग काम देव भी ईश्वर लोक छोड़ कर भारत की पुन्य नगरी में जन्म लेने का प्रारम्भिक आवेदन कर चुके हैं।
काली जी तो होजरी कपडो से ख़ास प्रभावित हैं।उन्होने नारद से कहा कि अगर उस समय ये कपड़े होते तो मुझे शंकर जैसे भँगेडी से विवाह नहीँ करना पडता!
आमोद अब हमारे पौढ आसिक्छित समाज को कभी आवाज़ बुलंद करने की कोई ज़रूरत नहीँ पडेगी। न कभी कही धरना देना पड़ेगा ।
हम कितने सुन्दर रंगो मे रंग गए हैं।
जय हो फिल्म उद्योग की…
जय हो फैशन जगत की…
(मैने समाज को इसके माध्यम से उजागर करने का प्रयास किया है ।कुछ हिन्दू देवताओं के नाम है उनके लिए छमा प्रार्थी हूँ। वो हमारे मालिक है मे उन्हे ठेस नहीँ पहुँचा सकता
मे सम्पूर्ण समाज से छमा माँगता हूँ इस नामो को अन्यथा न ले )

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