दोस्ती का खयाल आया था
दौर ने खास कुछ सिखाया था।।
दोस्ती का खयाल आया था।।
दरमियाँ इश्क की लड़ी नाजुक।
मै नहीं तोड़ जिसको पाया था।।
प्यार के दस्तखत मिटा न सका ।
इसकदर दिल में वो समाया था।।
आखें आंखों से बात करती'र'ही।।
भर के मीना जिन्हें सजाया था।।
लब से खामोश तन से बे-सुध वो।।
लौट कर दस्तरस में आया था ।।
मौलिक / अप्रकाशित
आमोद बिन्दौरी , फतेहपुर- उत्तर प्रदेश
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