मेरी गल्तियों को ,छमा कीजियेगा।।
मेरी गल्तियों को ,छमा कीजियेगा।।
पिता तुल्य हैं प्रभु,दया कीजियेगा।।
हुँ नादान अरु अल्प ज्ञानी अधम मैं।
हृदय से मेरे प्रभु रमा कीजियेगा।।
सकल ज्ञान तुम से, सकल सृष्टि तुम से।
हे करुणा के सागर दया कीजियेगा ।।
हे निर्वाण रुपम, दिगांतर,कलान्तर।
हे लक्ष्माधिपति ना मना कीजियेगा।।
है हरि नाम साधन, करे पार भव जो।
द्ववादश मन्ही मन जपा कीजियेगा।।
आमोद बिन्दौरी
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