जिन्दगी फिर बुने हसीं सफ़हे


बूंद  स्याही को छू कलम चहके।।
जिन्दगी फिर बुने हसीं सफ़हे।।(pages)
 
काश छंट जाए  रात ये नागिन।
सुबहो सारा फलक सजे संवरे।।

इश्क का  रख यकीं ज'हन यूँ  कुछ। 
गर मिले आँख,आँख न झपके।।

कौन डालेगा' जिन्दगी भर यूँ ।
बेवजह बात बात पे परदे ।।

सुन रही हो न घर की दीवारों ।
कुछ करो ऐसा के ये घर महके।।

मौलिक / अप्रकाशित 
आमोद बिन्दौरी , फतेहपुर- उत्तर प्रदेश

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