खुशबुएँ ज़ेहनी अभी भी कर रहे गुलजार क्यों??

खुशबुएँ ज़ेहनी अभी भी कर रहे गुलजार क्यों??
2122-2122-2122-212
आप को जाना ही है तो आज कल इतवार क्यों।
तोडना गर दिल ही है तो प्यार और मनुहार क्यों।।

आप की नजरें बयाँ करती, बहाना है नया ।
आप की इन भीगती पलकों से ये उपहार क्यों।।

शौख था गर भूलना ही भूल जाते बे -शबब।
खुशबुएँ ज़ेहनी , अभी भी कर रहे गुलजार क्यों।।

रोक लो इस छटपटाती रूह के एहसास को ।
जल चुका है आशियाँ जो खोज उसमें प्यार क्यों।।

देखना गर चाहते हो मेरे चेहरे में ख़ुशी।
आप ही लेकर खड़े हो  हाथ में हथियार क्यों।।

मेरे अंदर ही कुचल देते मेरे अहसास को।
अधमरी इस पौध पर अब इश्क की बौछार क्यों।।

हूँ मैं जाहिल,नीच,घटिया,और दूषित  खून है।
गालियों की उष्ण बारिश  कर न दो ,अब यार क्यों।।
मौलिक अप्रकाशित /आमोद बिन्दौरी

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