ऐ पालक, प्रिए,संगनी, पथ प्रदर्शक

ऐ पालक , प्रिए, संगनी,पथ प्रदर्शक 
नमन हां तुम्हे है, नमन हां तुम्हे है।

विदा हो चली पंच तत्वों की माया
नदी में प्रवाहित हुई अस्थि काया
हवा हो चुके  धुआं और बचे कण 
हैं अवशेष कुछ हो रहा उनका चिंतन

उनकी वो भोली सरलता वो ममता 
भुलाए नहीं स्वाद उनका है घटता 
जीवन सफर पर चलीं साथ थी वो
यूं आंखों में मेरे इक विश्वास थी वो

था बीहड़ , अधूरा , अस्तित्व के बिन 
मिला साथ निरखता रहा मै पल छिन
स्मृति में मेरी मुस्कुराती महकती
बाते हैं जैसे अभी आज कल की 

कोने कोने चमकती रहेगी यूं सीरत 
ऐ संघर्ष की छांव ममता की मूरत 
ऐ पालक , प्रिए, संगनी,पथ प्रदर्शक 
नमन हां तुम्हे है, नमन हां तुम्हे है।
आमोद बिंदौरी ....
 स्मृति शेष  श्रद्धांजलि

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