जीवन की उलझनों से कोई रास्ता नहीं



यूं अर्श ए जिंदगी से मेरा वास्ता नहीं ।
सब आप की इनायत मुझको गिला नहीं ।

जो भी दिखाया आपने अपनी निगाह से ।
हां सारा शहर देख लिया देखता नहीं ।।

बेदम हुए हैं लोग यहां बात बात पर ।
जीवन की उलझनों से कोई रास्ता नहीं ।।

इतना डराए वक्त की जुल्मी हवा मुझे ।
इक सच ये जिंदगी से मुसलसल मिला नहीं ।।

आवाज दूर तक न सही ..आ रही तो है ।
सूखे हुए हलक से कोई कभी चीखता नहीं ।।

देखा इमारतों के अलीशा दीवार ओ दर।
कहते हैं मुझे रोक यही बा वफ़ा नहीं ।।

किसकी सुनूं आमोद, किसे भूल जाऊं मैं।
है अल्प ज्ञान मुझमें, युँ मै देवता नहीं ।।

आमोद बिंदौरी

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