मां ....तुम अनमोल हो

थूक से पल्लू गीला कर 
मेरे रूखे रुखसार को पोछा किया
और फिर उसी कोने से 
मेरे होठों को रसीला किया 
मेरे माथे में एक कोना ढूंढा 
अपनी आंख के कोने से 
काजल उधार लिया 
और मेरे माथे में टीका किया 
उंगलियों ने उनकी ,कंघी की तरह
मेरे उलझे उलझे बालों को सीधा किया 
फिर उनकी ठहराई हथेली ने
कंधा दबाया, बाजू दबाई 
मेरे सीने को को सहलाते हुए 
मेरी पैंट जो इलास्टिक की थी
उसे घूमते हुए फिट किया 
मेरे नन्हे से पैरों की उंगलियां
और तलवे को दबाते सहलाते 
नन्ही सी चप्पल पहनाई 
और खड़ा कर के बोली 
मेरे राजा बेटा ....तैयार हो गया 
मां मै कई जन्मों में तेरे प्यार का 
मोल नहीं भर सकता ..तुम अनमोल हो
आमोद बिंदौरी 

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