वो कहतें है तु पत्थर है..

वो कहते हैं तु पत्थरहै
बहर:-1222-1222-1222-1222

नहीं मिलती तबीयत तो ,वो कहते हैं तु  पत्थर है
मगर जाना नही उसने, की कितना मन समंदर है

हुई हरकत बुरी हमसे ,बदलने की जो कोशिस की
तभी मालुम  हुआ हमको, खिलाड़ी तो सितमगर है

सिला अपनी मुहब्बत का,लिखा पन्ने पे जब  मैंने
खुदा भी रो पड़ा बोला, धरा का तू सिकंदर है

जो मुंसिफ घर गया उनके, उधारी में दिया लेने
चिरागां हंस के बोला तब,अँधेरा तेरे अंदर है

बताओ रास्ता मुझको ,हवा पानी जरा बोलो
लुटा हूँ मैं मुहब्बत में ,मुहब्बत क्या बवंडर है

अप्रकाशित/ मौलिक
आमोद बिंदौरी

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