कुछ ऐसे था पुछा उसने -2

वाकिफ है तू कण कण से
मैभी तो वाकिफ हो जाऊँ
यदि पूछे मुझसे मालिक मेरा
उसके जवाब को दे पाऊँ

रिस्तो का मुझको क्या लेना
मैं खुद उनकी ही कडियाँ हूँ
आज नहीँ लैला कल लौटूँगा
उल्टा गिनता अपनी घडियाँ हूँ

भेजा है यदि मुझको उसने
कठ पुतली ही बनने
नाचूगा मैं जोरजोर
बाँध पाजेब पैरन में

सपनो की क्या बाते करना
सपने तो  सपने होते हैं
हिस्से में आ ही जाते हैं
जो सच में अपने होते हैं

ना ही उल्झन मेरे मन मे
ना ही बंधन लैला मुझको
काम दिआ है मुझको रब ने
उसको ही है करना मुझको

थका हुआ हुँगा मैं  पथ  से
मेरे दर्द को दूर तू करना
प्यार भरा दिल अपना लेके
प्यार भरी तुम बाते करना

दरवाज़े पर खड़ी रहे तू
इतना मुझको तुमसे कहना
आख़िर लौटू पथ से जब मैं
मुझको तू ऐसे ही मिलना

कुछ ऐसे था पूछा उसने
कुछ ऐसे कहा था मैने
खड़ी है वो मेरे इंतज़ार में
मे भटक रहा हूँ जिदगी की राह में……

आमोद बिंदौरी

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