एक सुबह

कभी कभी पूरी रात
उलझन मेँ गुजर जाती है!
जब नीँद आती है
तो सूरज की किरण जगाती है
जिँदगी...वक्त की दौड मेँ खडा कर जाती है
कम्बक्त ... ना कोई दातून लाती है
ना मुह धुलाती है
आखिर! खाली पेट जिँदगी
निवाले की तलाश मेँ लग जाती है
आमोद बिँदौरी 11.12.2013

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