मेरे घर की मछलियाँ…
ये नन्ही कलियाँ ही
,हर दम गुलशन को सजाती हैं
यही वो तोतली वोली है
जो कोयल से बतियाती हैं
जिस घर भी ये जाती हैं,
वहाँ ममता जन्म ही पाती है
ये मछली मेरे आँगन की,
कितनी ख़ुशियाँ ले आती है
खण्डर था घर दीवारों का
इसी ने इन्हे सजाया है।
रूप बदल कर फिर इसने
मेरे आँगन को चहकाया है
समाजों ने नाम रखे
बडे-बड़े मेरी मछली के
मैने तो बस बिंदौरी
इसमे ममता का घर ही पाया है
ये मछली मेरे आँगन की
कितनी ख़ुशियाँ ले आती है
ये नन्ही नन्ही कलियाँ ही
हर दम गुलशन महकाती है
आमोद बिंदौरी
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