अजब सपना…(हास्य )
आज आप लोगो की इजाज़त हो तो कहे
कुछ चटपटी हास्य रचना होजाए
पहली बार लिखी है तो…
आलोचना ज़रूर करिए गा
पेश है…
आज रात देखा अजब सा सपना
मित्रों बिल्कुल थी दुर्घटना
घर मे बीबी ख़ास बनी थी
मुझे पड़ा ले झाड़ू डटना…
झाड़ रहा घर कोना गैलरी
नींद मे थीं वो पहन कैफरी
बर्तन माज रहा मन भाई
मत पूछो कितनी कल झाड़ू खाई…
दूध वाले ने बेल बजाई
बच्चो ने ली अंगडाई
दो को टाई पहनाई
तीसरे ने आवाज़ लगाई…
जाग के आई मैडम बाँस
लाओ पेपर चाय के साथ
मैने ये आवाज लगाई
बच्चो को तयार कर आई…
दौड़ा ले मैं चाय की ट्रे
फँसा पैर दरवाजे की रे…
गिरा लगी चोंट की ज़ोर
बीबी कर रही थी शोर…
दोपहर तक तुम रोज़ हो सोते
आदत तुम्हारी बहुत ही खोटी
जागा करो तुम जल्दी यार
बिंदौरी प्यार देख आया ऐतबार…
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15/04/15
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